
हमारे बारे में
जय दुर्गे पशुपति ट्रस्ट हिमालय की पावन भूमि उत्तरकाशी से संचालित है। यह ट्रस्ट पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही उस दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाता है जिसमें गंगोत्री गोमुख से अक्षय तृतीया के दिन गंगाजल कलश भरा जाता है और वर्षभर अखंड ज्योति के साथ पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यह कलश नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक हेतु पहुँचाया जाता है। यह परंपरा कई पीढ़ियों से निरंतर चली आ रही है और आज भी इसके निर्वाहक गुरुदेव महाराज महेन्द्र प्रसाद जी हैं।
गुरुदेव महाराज महेन्द्र प्रसाद जी और उनके पूर्वज कई पीढ़ियों से नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के राजपुरोहित रहे हैं। वे इस गौरवशाली परंपरा और सेवा को आगे बढ़ा रहे हैं।
गुरुदेव महाराज महेन्द्र प्रसाद जी शिव शक्ति उपासक हैं और अपने अनुयायियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनकी दिव्य दृष्टि से भक्तों को जीवन की समस्याओं का समाधान मिलता है। गुरुजी के आशीर्वाद से भक्तों को यश, वैभव, लक्ष्मी और आरोग्य की प्राप्ति होती है। उनके प्रवचन, साधना और ध्यान से भक्तों को आनंद और परमानंद का अनुभव होता है।
गुरुदेव महाराज महेन्द्र प्रसाद जी को एक दिव्य स्वप्न में भगवान शिव ने आदेश दिया कि उत्तरकाशी में उनके नाम से एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाए। यह अब गुरुजी का आजीवन संकल्प और मिशन बन गया है। मंदिर का स्थल पहले ही चिन्हित किया जा चुका है और मई 2026 में भूमिपूजन एवं शिलान्यास समारोह आयोजित होगा।
गुरुजी ने अपने अनुयायियों और भगवान शिव के भक्तों से आह्वान किया है कि वे इस दिव्य कार्य में सहयोग करें और उत्तरकाशी, उत्तराखंड में बनने वाले भव्य पशुपतिनाथ मंदिर के निर्माण में योगदान देकर पुण्य के भागी बनें।
प्रस्तावितमंदिरसुविधाएँ!
विशेषरूपसेउत्तरकाशीपशुपतिनाथमंदिरकेलिए
यहाँकीसुविधाएँभक्तोंकोप्राकृतिकऔरआध्यात्मिकअनुभवदेनेवालीहोनीचाहिए:
- गंगाजलकलशऔरअखण्डज्योतिकीपरंपराकोआगेबढ़ानेकेलिएविशेषपूजास्थल।
- ध्यानकेंद्रऔरयोगस्थल – हिमालयकीशांतिमेंसाधनाहेतु।
- सांस्कृतिककार्यक्रमस्थल – महाशिवरात्रिऔरअन्यपर्वोंपरआयोजनहेतु।
धार्मिकऔरआध्यात्मिकसुविधाएँ
- गर्भगृह– जहाँमुख्यदेवताकीमूर्तिस्थापितहोतीहै।
- मंडप/सभागृह – भक्तोंकेलिएपूजा, भजनऔरप्रवचनकास्थान।
- अखण्डज्योतिऔरयज्ञशाला – निरंतरपूजाऔरअनुष्ठानहेतु।
- प्रसादवितरणकेंद्र – भक्तोंकोप्रसाददेनेकेलिएसुव्यवस्थितस्थान।
भक्तोंकेलिएसुविधाएँ
- धर्मशाला/आवास – दूरसेआनेवालेश्रद्धालुओंकेठहरनेकीव्यवस्था।
- भोजनालय/अन्नक्षेत्र – निःशुल्कयासुलभदरपरभोजनकीव्यवस्था।
- पेयजलऔरस्वच्छता – शुद्धजल, शौचालयऔरस्नानगृह।
- बैठनेकीव्यवस्था – वृद्धऔरदिव्यांगभक्तोंकेलिएविशेषस्थान।








